कल मेरे पिताजी के संयोजन और संचालन में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन शाहगंज,जौनपुर मे जाने हेतु कुछ वरिष्ठ साहित्यकारों का मेरे घर आना हुआ.
ऐसे में पिताजी के परम मित्र कृष्णवतार त्रिपाठी "राही" चाचाजी ने अपनी प्रकाशित काव्य कृति "जीवन के चिथड़े पन्ने" को पीताजी के आशीर्वाद स्नेह और प्यार को शामिल करते हुए मुझे प्रदान की मैं आप सभी वरिष्ठ जनो के इस प्यार और आशीर्वाद से अभिभूत हूं ✍️✍️🙏🙏
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