Friday, 19 April 2024

(नीलकंठ)

मुझे भी पढ़ेंगे
कुछ लोग किसी दिन
मेरी भी
अदब की झील में
नहाएगी कोई नीलकमल,

चांदनी रात में
सिसकेगी मोहब्बत मेरी
तुम्हें आना पड़ेगा
झील के इस पार
नाव में बैठकर
पुकारेगा
आखिरी सांस तक
तुम्हे,
यह तुम्हारा नीलकंठ.

ये घाट के पत्थर 
ये किनारे 
गवाही देंगे
की कभी यही मरा था
अपनी नीलकमल की याद में
एक नीलकंठ.

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