(बुलाती है शराब मुझको)
शाम होते ही----
बुलाती है शराब मुझको.
सोए हुए लोगों को,
मंदिर की आरती
और अज़ान,
हमें तो----
जगाती है,शराब मुझको.
शाम होते ही,
बुलाती है,शराब मुझको
बंद कमरे में पीते हैं
बाइज्ज़त कुछ एक लोग
और मैं शहर की सड़कों पर
नंगा पिए फिरता हूं
इतनी---
चढ़ जाती है,शराब मुझको.
शाम होते ही---
बुलाती है, शराब मुझको.
काशी-काब़ा कुछ नहीं,
मेरे लिए तो----
ठीए ठीए पर स्वर्ग है
जब कहीं भी,
ए"रंग"----
नज़र आती है,शराब मुझको.
शाम होते ही
बुलाती है,शराब मुझको.
@@@ रंगनाथ द्विवेदी
Mo.no.7800824758
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