Wednesday, 21 August 2024

(होम वर्क करवाते हैं)

(होमवर्क करवाते है)
बहुत क्यूट है दादा मेरे--होमवर्क करवाते है-------
जब थक जाती हूं तो मुझको गोदी ले,
मेरे बाल सहलाते है,
बहुत क्यूट है दादा मेरे--होमवर्क करवाते है।
कैसे वे भी पढ़ते थे जब मेरी तरह वे बच्चे थे,
डाट पड़ी थी उनको भी अपने मैथ के टीचर से,
मजे और चटखारे ले वे सारी बात बताते है-----
बहुत क्यूट है दादा मेरे--होमवर्क करवाते है।
मेरी खातिर रखते है वे चाॅकलेट के डब्बे,
डेली मुझको दो देते है,
दो खुद मेरे साथ मे खाते है-----------
बहुत क्यूट है दादा मेरे--होमवर्क करवाते है।
फिर शाम को साथ मुझे ले करते है खरीदारी,
मेरे नन्हे पाँव थके तो कहते है,
बिटिया तुम ये सहना सीखो,
फिर रस्ते मे पंचतंत्र की एक कहानी सुना,
मुझे समझाते है---------------
बहुत क्यूट है दादा मेरे--होमवर्क करवाते है।
घर आते ही ट्यूशन वाले सर की बाईक देखी,
हाथ मुँह धूल बैठ गई फिर पढ़ने,
जैसे ही छुटी ट्यूशन से फिर भागी दादा जी के कमरे मे,
दादा मेरे उठा रिमोट फिर टीबी पे,
मेरी फेवरेट कार्टून डोरेमाॅन लगाते है------
बहुत क्यूट है दादा मेरे--होमवर्क करवाते है।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर--222002(उत्तर-प्रदेश)।

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।
मासिक बाल पत्रिका मे प्रकाशनार्थ भेजी हुई मेरी बाल कविता।

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