Friday, 9 August 2024

(शहीदों का गांव)

(शहीदो का गाँव)
इस गाँव की औरत कभी बेवा नही होती--
इस गाँव मे कभी लाशे नही आती-----
तिरंगे मे लिपटे शहीद आते है।
यहा की कोई भी बुढ़ी माँ-------
काशी या काबे नही जाती,,,,,,,,,,,,,,,,,,
ऐ,रंग----वे फिर से शहीद बेटे की----
वर्दी का धूल साफ कर--------
सरहद की हिफाजत के लिये------
पोते पालती है।

जय हिंद जय भारत

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