Friday, 30 August 2024

(हमारी धडकनों की)

हमारे इश्क़ के--------------
मस्जिद की अजा़न है वो,
मै शेख हुँ उसकी धड़कनो का,
मेरी साँसो की पठान है वो।
हम जीते है मुकद्दस सरियत,
मै उसका पाकिज़ा फतवा हुँ,
चुमता हुं उसे--------------
मेरी इन आँखो की कुरआन है वो।
इल्में चराग रौशन है उसमें भी,मुझमे भी 
मै उसका आसमानी गुफ्तगू हूँ,
सुनता हु उसे!
एै,रंग------वे महज एक लड़की नही,
मेरी मुकम्मल जुबान है वो।
रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo. no----7800824758

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