Sunday, 20 October 2024

(उजाले की रात है)

(उजाले की रात है)
घर मे देवता आयेंगे,
उजाले की रात है।
दुःख,दर्द भगायेंगे,
उजाले की रात है।
नेह भर के रख दूँ,
आज की थाली-
वे भोग लगायेंगे,
उजाले की रात है।
ऐ रंग,-
क्या अमीर?क्या गरीब?
वे आज-
सब के घर जायेंगे,
उजाले की रात है।
घर मे देवता आयेंगे,
उजाले की रात है।

ढ़ेर सारे दीपो के साथ दीपावली की
शुभकामनाऐ,-रंगनाथ दुबे।

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