Sunday, 6 October 2024

(बांसुरी रोई)

(बाँसुरी रोयी)
फूल रोया,
फूल की पाँखुरी रोयी।
इतना दर्द था,उसके जाने का,
ऐ रंग,-
कि अधर पे रखा-
तो बाँसुरी रोयी।

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