लग रहा कि जैसे
गा रही हो
ठुमरी,दादरा,टप्पा
अख्तरी बेगम.
सामने चांद है,रात है,
तारे है
उन्हीं के बीच दिख रही
अपने आप में डूबी
और खोई सी
अख्तरी बेगम.
उसके हौले–हौले से चलने की आवाज़
करीब आती जा रही
शायद! मेहमान खाने में
फिर किसी से मिलने आ रही है
अख्तरी बेगम.
ना कुछ खोने का दर्द,
ना कुछ मिलने की चाह
बस एक तार टूटा
और इस जमीं से
सिर्फ विदा हुई
मरी नही
अख्तरी बेगम.
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियाँपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
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