Saturday, 12 October 2024

(मैं भी कुम्हार हूं)

(मै भी कुम्हार हूँ)
हा मै भी----------------
अपने गीतो की चाकी पे,
शब्दो की मिट्टी रख,
कुछ गीत------------
उसके दिवाली के दीये की तरह बनाता हूँ।
वे भी कुम्हार है मिट्टी के दियले का,
और मै भी कुम्हार हूँ-------
अपने गीतो का।
वे उपले की आँच में,
पकाता है दियलो को और मै--------
अपने हृदय के उपलो की आँच में,
गीतो के शब्द पकाता हूँ।

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