Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 20 October 2024
(गुलेल नीलोफर)
(गुलेल नीलोफर)
छुट रहे-
गुड्डे और गुडियो के,
खेल नीलोफर।
अब कैसे होगा,
तेरा अपनी सखियो से-
मेल नीलोफर।
रो रहा,रंग,-
अमिया को तोड़ने वाला,
तेरा छज्जे पे रखा-
गुलेल नीलोफर।
@@@नीलोफर यानी एक सिल-सिलेवार दर्द।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment