(हमदर्द की रूह-अफ्ज़ा)
तू मेरी ,
शरीक-ऐ-हयात है, कि--
हमदर्द की रूह-अफ्ज़ा.
ये तेरी----
नर्म-नाजूक सी कलाई की छुअन,
हाय !!
तू मह़ज़ गिलास है ,या ----
हमदर्द की रूह-अफ्ज़ा.
ये शर्म से झुकी नज़र,
उसपे सुर्खी ,तेरे गाल की,
बता तू ,
गुलाब है, कि---
हमदर्द की रूह-अफ्ज़ा.
ये हवा की शरारत ,
ये उड़ती तेरी जुल्फें,
हाय !!
तू खुबसूरत ढ़लती शाम है,या ----
हमदर्द की रूह-अफ्ज़ा.
टहलना ----
तेरा हौले-हौले यूं छत पे
और मेरा देखना तुमको ,
तू मेरी मुमताज़ है, या ----
हमदर्द की रूह-अफ्ज़ा.
यह मेरी स्वरचित व अप्रकाशित रचना है.
रचयिता-रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P )
Mo.no.--7800824758
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