Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 20 May 2025
(दिया और चराग़ अलग है)
(दिया और चराग अलग है)
इसका शुरुर,इसका मिज़ाज अलग है,
मुहब्बत का रिवाज़ अलग है।
यहां होते है सजदे महबूब के,
यहां की मस्जिद और नमाज़ अलग है।
है ये तन्हाई की चादरपोशी,
यहां की कब्र और मज़ार अलग है।
यहां हर रात उर्स है और धड़कने कौव्वाली,
ऐ,रंग----यहां दिया और चराग अलग है।
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