एहसास,
औरों के खुबसूरत कहने
या फिर
औरों के मूंह से सुनने पर नहीं होता
लेकिन जब तुम मुझे खूबसूरत कहते हो
तब एहसास होता हैं
कि वाकई मैं खूबसूरत हूं
क्योंकि रोमांटिक तरीके से
मुझे खूबसूरत कहने का अधिकार
सिर्फ़ और सिर्फ तुम्हें हैं
मैं औरों की आंखों में
अधूरी खुबसूरत हू
क्योंकि उनकी सारी खुबसूरती
मेरी देह के इर्द गिर्द तक सीमित हैं
लेकिन तुम
मेरी इस खुबसूरत सी देह के
दूर तलक फैले एहसास
को उस अधिकार से छूते हो
जहा
मैं अकेली खुबसूरत नही रह जाती
बल्कि मैं केवल मैं रह जाती हूं
मेरी इस स्त्री देह में
तुम और सिर्फ तुम खुबसूरत रह जाते हो
यही खुबसूरती पाने और जीने की
मरीचिका ही
खुबसूरती के घाट
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