Thursday, 22 May 2025

(बांह में मदिरा रही)

(बाँह मे मदिरा रही )

जब सभी ने छोड़ा मुझको-
तो हाथ मे मदिरा रही.

हम तड़प के रो उठे,
कोई नही,कोई नहीं-------
बस साथ मे मदिरा रही.

घर मेरा शमशान सा था,
और साँस मे मरघट मेरे ,
मै फिर भी जिंदा रह गया ,
क्योंकि बिस्तर पे भी मेरे---
रात में मदिरा रही.

रोजगाली ,रोज-नफरत 
है इसे जाने क्यों हासिल ?
ये वफा है,ये वफा है
बाकी दुनिया बेवफा है,
मै गिरा तो ये गिरी,
सब आते जाते रह गये,
उस राह मे भी साथ मेरे--
बाँह मे मदिरा रही.

रचनाकार--रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)

@@@एक अलहदा टेस्ट की अलहदा रचना जो शायद आपको भी रास आये।

No comments:

Post a Comment