Monday, 5 May 2025

(वैगन बेलिया)

(रोमांटिक वैगन बेलियाँ)

वे सायबान के पिछे---
शाम को छिपता हुआ सूरज,
और काम से लौटती पहाड़ि लड़कियाँ, 
ना कोई थकन,ना कोई सिकन,
अलमस्त,अल्हड़पन--------
बाते करती,खिल-खिलाती ऐ,रंग--------
मेरी कविता की 
वे रोमांटिक वैगन बेलियाँ।

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