Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 23 September 2023
(किडनी बेच दू)
(किडनी बेच दू)
मैं कहां कमा सका
दो वक्त की रोटी.
उस पर बिटिया सयानी हो गई
सोचता हूं,कि
मैं उसकी ब्याह की खातिर
ऐ "रंग"––
शहर के किसी डॉक्टर को
अपनी किडनी बेच दूं.😢😢
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment