Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 9 September 2023
(घर को छोड़े)
(घर को छोड़े)
एक जमाना हुआ तुम्हे जिस घर को छोड़े,
उस घर की,छत की मुंडेर पर-----
बैठते है वही दो कबुतर के जोड़े,,,,,,,,,
जिन्हे कभी हम तुम तकते थे------
घंटो बिना मूँह मोड़े।
एक जमाना हुआ तुम्हे जिस घर को छोड़े।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment