Sunday, 24 September 2023

(मेरे यार की बस्ती)

(मेरे यार की बस्ती)

कभी पतझड़ , कभी बहार की बस्ती
है शहर से दूर - 
मेरे गुनहगार की बस्ती ।
ऐ रंग ,- रूहे चैन की खातिर
ले चल मेरा जनाजा - 
मेरे यार की बस्ती ।

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