हां मै-------
औरतो के चूड़ियों की भाषा जानता हूं .
क्यूकि इनकी खनक में,
एक लय है दर्द का,,
और एक लय है खुशी की,
लाख छिपाये हमसे,
कोई औरत,
चूड़ियाँ अपनी
मै फिर भी पहचान जाता हूं
बिना उसके खनके,
क्योंकि ए "रंग "मै -----
औरतो के चुड़ियो की भाषा जानता हूं .
Rangnath Dubey भैया
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