Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 13 September 2023
(हिन्दी)
(हिन्दी)
मै अब तलक नही भूला,अपने गाँव की हिन्दी-----------
वे पनघट की तरफ जाती तेरे पाँव की हिन्दी।
क्या जाने है आखिर भला ऐ,रंग-----
ये कंकरिट का जंगल,,,,,,,,,,,,,,
कि क्या होती है?-----
अपनो से लगाव की हिन्दी।
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