Tuesday, 19 September 2023

(नई संसद)

(नई संसद)

तुम पर गर्व है,फक्र है
ऐ नई संसद!

बहुत कुछ बदला समय के साथ
आखिर कब तलक पहनती
तू किसी और की दी हुई 
भीख में,मिर्जई संसद.

उतार दे!
आ चल! अब नए चोले में 
क्योंकि,ये कुनबा तेरा है,
संस्कार तेरे है
तू भारत है
और तेरी आत्मा है 
यह नई संसद. ✍️✍️

यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.

रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
mo.no.7800824758

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