क्या है?
उन आतंकियो और तुममें कोई अंतर,
तमाम इंसानी जानो से खेलने वाले---
ये आततायी सही हलाक हुये,
भले सही या गलत था इनका इनकाउंटर।
पर सियासत तेरा स्तर----------
जिस्मानी तवायफ़ो से गया बीता है,
वे जिस्म देती है!
और तुम नामुराद उतार देते हो------
अपने मादरे वतन के पीठ खंजर।
सच एैसे दोगलो तुमपे उबकाई आती है,
तुम एक जहरीले----------
आस्तीनी साँप हो अपने ही घर के अंदर।
@@@कल के आतंकी इनकाउंटर का एक छोटा सा समर्थन।
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