Wednesday, 8 November 2023

(पांव रिक्शा)

चेहरे पे एक थकन————–
होंठो पे सुलगती बीड़ी,
पेट भरने की खातिर——–
सिने से खिचने को पाँव रिक्शा,
बाबू यही है अपना किस्सा।
तपती डामर की सड़क पे,
हम रोज लिखते है अपनी भूख,
बाबू यही है हमारी जिंदगी,
और सिने से खिचने को पाँव रिक्शा,
बाबू यही है अपना किस्सा।
कभी किसी पुलिसिये की बेजा गाली,
बीन किराये के उतरना,
चेहरे पे चंद थप्पड़,
और पसीने से भीगे तर-बतर चेहरे को,
मैले गमछे से पोछना,
फिर आगे बढ़ जाना पिके गुस्सा,
पेट की खातिर———–
सीने से खिचने को पाँव रिक्शा,
बाबू यही है अपना किस्सा।
छोटे बच्चे बीमार बीबी,टपकती छत,
अपनी घर से दुर खुले आसमान तले,
सुलगती बीड़ी फूटपाथ,
और अपने दाहिने हाथ से,
लोहे की सिकडी से बांध,लगा ताला
ठिक सिरहाने सारी रात खड़ा,
मेरी जिंदगी की तरह पाँव रिक्शा।

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