कल पारिवारिक और व्यक्तिगत यात्रा पर अमेरिका गए,,, साहित्य की समस्त विधाओं में एक समान पकड़ रखने वाले या वर्तमान हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने का श्रेय जिन-साहित्यिक पुरोधाओ को सर्वाधिक जाता है उनमें से एक प्रमुख नाम "अरुण अर्णब खरे" सर का है,,, कल उनसे साहित्य की विभिन्न विधाओं पर ना सिर्फ मेरी वार्ता हुई बल्कि वर्तमान के तमाम कुछ बड़े नामो की चर्चा उनसे सुनना खासकर उनका "व्यंग्य लेखन तो हमारे समय की किसी साहित्यिक वसीयत की तरह है" उनका यह प्यार, स्नेह और आशीर्वाद मेरी छोटी सी लेखनीय के लिए एक हस्ताक्षर की तरह है ✍️✍️🙏🙏
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