Rangnath Dubey's Poems
Monday, 20 November 2023
(ठंड की रात)
(ठंड की रात)
तुमसे दुर-------------
ये तन्हा गुलाबी ठंड की रात।
और तेरे बुने हुये मफ़लर का श्पर्ष,
एक तेरे प्रेम सुगंध की तरह,
कट जाती है,बीना तेरे रहे भी-----
अपने रिश्तो के संम्बंध की रात।
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