Wednesday, 8 November 2023

(माँ )

(माँ)

माँ-
    मै ढ़ेरो खाता हूँ,पर तेरी 
चुपड़ी रोटी की भूख-
रह जाती है.

आज सबकुछ है,
स्लीपवेल के गद्दे,एसी कमरे
पर नींद-
घण्टो नही आती है.

ऐ रंग यादो मे सिर्फ--
माँ की गोद,
और लोरी रह जाती है.

रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी.

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