Saturday, 25 November 2023

(राँची के सफ़र में)

(राँची के सफर मे)

तुम यूँ ही नही उतर आयी
मेरी गजल मे।
हमने तुम्हे देखा था,
राँची के सफर मे।
वे सादगी,वे हया
वे दिलकश मुस्कुराहट,
हाय!लुट गया था,मै
राँची के सफर मे।
मै अब भी तलाशता हूँ,
ऐ रंग,-तुम्हे अपने,
राँची के सफर मे।

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