Wednesday, 1 May 2024

(साइकिल है भाई)

(साइकिल है,भाई)

ये हमारी यादों में, --
बसी हुई, बचपन के--
फिल्म की कुछ रील है, भाई.
ये कैची, मार के चलाता हुआ, मैं
और हमारे दादा की----
बहुत प्रिय ,साइकिल है, भाई.
इस तरफ ----
धान की लहलहाती फसल
और उस तरफ ----
सिंघाड़े वाली झील है, भाई.
जहां गिरे ,चोट तो न आई ,
पर डर गया , उस समय
घर लगा जैसे ----
बहुत मील है, भाई.
दबे पांव,
बचने की जुगत फेल हुई,
दादा ने ,कड़क कर पूछा ,
कहांं गये थे,
उफ !! डर-सहम गया 
और सांस यूं लगा कि,जैसे
साइकिल की----
टूटी हुई तील है, भाई.
लेकिन ,दादा समझ गये ,
प्यार से मुझे दुलारा - पुचकारा
और कहा,----
पगले !!मेरे पोते से अच्छी
और प्यारी इस दुनिया में----
नहीं कोई साइकिल है, भाई.

@@ रंगनाथ द्विवेदी

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