Monday, 17 June 2024

(मनोज मुन्नतसीर)

(मुंतशिर और डॉक्टर राही मासूम रज़ा)

अदब एक तमीज 
एक सलीके का नाम है
मुंतशिर .
काश ! तुमने
डॉक्टर "राही मासूम रज़ा" को पढ़ा होता
तो आज 
"आदि पुरुष" का कद भी
"महाभारत" से बड़ा होता.

तुम लफंडूस हो,चोर हो
दो कौड़ी के छिछोर हो
तुमने
मर्यादा लांघी है लिखने की 
तुम भूल गए
की राम 
इस देश के मर्यादा पुरुषोत्तम है.

तुम इस देश के 
सनातनी नही 
सनातनी तो डॉक्टर "राही मासूम रजा" थे
जो कृष्ण लिखकर
हमारे दिलो के किरदार हो गए,
वे रसखान थे
तुम हिंदू होकर भी
नाली के कीड़े
और नाबदान हो गए.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.

रचनाकार--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)
mo.no.7800824758

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