ना ही पूजा
ना ही किसी मस्जिद की ,
अजान है, साहब.!
ये लड़की ,
इस दौर-ए-ग़ालिब की,
दीवान है , साहब!
बड़़े सलीके और
तमीज़ से ,
लिखा है कई रात ,
ये एक रात हिन्दू
तो एक रात मेरी ,
गज़लों की ----
मुसलमान है , साहब!
यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
mo.no.7800824758
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