Wednesday, 5 June 2024

(शकुनी)

(शकुनी मामा उर्फ गुफी पेंटल)

महाभारत
के किरदार का शकुनी 
बेशक वक्त और समय के पासे से हार गया.
लेकिन 
उसके भांजे कहने की वे स्टाइल 
वह अदा
जेहन में जिंदा है.

वे सच मे
एक पूरी दौर का मामा था 
जिसने महाभारत में
अपने भांजो के हक में 
द्रोपदी को जुए में जितने 
के सारे पासे,फेके.

वह सिसकती फ़रियाद करती द्रोपदी
वे चीर खींचते दुशासन
वे मामा के होठों की तिर्यक मुस्कान
ओर भांजे कहने के 
दृश्य सामने आ गए .

लेकिन समय के साथ 
उसके भांजों के लिए फेके पासे 
मनहूस हो गए 
वे नाटक था
किरदार था,झूठ था उसका 
लेकिन गुफी पेंटल,
केवल गुफी पेंटल नही
वे हम भांजों की जूए फड़ का
उस्ताद था.

लेकिन उसकी जिंदगी के पासे  
को इस मर्तबा
ईश्वर के दूतो ने
उसकी फड़ के बाहर फेक दिया,
तुम्हे आखिरी विदाई
हम सभी के महबूब गुफी पेंटल.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जौनपुर,222002 (U P)
mo.no.7800824758

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