Monday, 3 June 2024

(मैं कुछ नहीं लिखता)

(मै कुछ नही लिखता)
वे तो उसकी यादो के कुछ गुलाब है,जो लिखते है------
मै कुछ नही लिखता।
वे तो सामने जल रहे उसकी यादो के चराग है,जो लिखते है----
मै कुछ नही लिखता।
वे सामने की दराज़ मे रंखे कालेज के जमाने के,
कुछ किताब है,जो लिखते है----------
मै कुछ नही लिखता।
वे सामने रंखे छिप-छिपा के आने वाले उसके कुछ नकाब है,
जो लिखते है-----------
मै कुछ नही लिखता।
वे खिड़की के रास्ते कमरे मे छन के आती रौशनी,
और उस रौशनी मे उसकी रुप का चाँद है,जो लिखते है-----
मै कुछ नही लिखता।
मेरे इर्द-गिर्द चारो तरफ़ उसकी रुह अफ़जा़ खुशबू है,
जो लिखते है--------------
एै"रंग" मै कुछ नही लिखता।
 

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)
mo.no.-----7800824758

लेखन का एक अलग टेस्ट जो मेरा एक प्रयोग मात्र है।

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