ऐ उड़ीसा--
तेरी यह आंसुओं वाली ट्रेन
हमे याद रहेगी,
ना भूलूंगा क्योंकि
इस हादसे की मरसिया
नीरज की तरह
अब हमारे पास रहेगी.
मैं जानता हूं कि
तेरी फाइलों में गुम हो जाएगा यह दर्द
तू सरकारी महकमा है,
पर जीना है उन घरों को यह हादसा
उनके दिलों में आंसू रहेगा और
ता-उम्र चेहल्लुम की यह रात रहेगी.
ऐ उड़ीसा-
तेरी पटरियों से होकर फिर गुजरेगी ट्रेन
फिर उतरेंगे चढ़ेंगे मुसाफिर
तेरी कानों में
हर रोज एक नई आवाज रहेगी.
ऐ उड़ीसा--
तेरी यह आंसुओं वाली ट्रेन
हमें याद रहेगी.
✍️✍️वैसे इस भाव श्रद्धांजलि में एक जगह मैंने मरसिया शब्द का प्रयोग किया है जिसका अर्थ "शोक गीत" से है.
😢😢😢😢😢😢
यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.
रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)
mo.no.7800824758
No comments:
Post a Comment