जब कोई तलाकशुदा औरत अपने मासूम बच्चो को भूख से रोता और सिसकता देखती है,तो उस बच्चे की तलाकशुदा माँ का दर्द--"मुझ जैसे लेखक के कलेजे को भी चाक कर देता है.
और मुझे लगता है कि इस खूबसूरत से मज़हब को कुछ जेहन से बीमार शौहर और मौलवियों ने कहांं से कहां पहुंचा दिया है. इन्हीं की वजह से आज--"इस्लाम और कुरान की पाक आयत भी अपनी अमीना की खुबसूरत आंखों में आंसू देखने को मजबूर है."
सच तो ये है कि इस्लाम मजलूम औरत की आंख का आंसू बन के रह गया है,जिसका हर कतरा जैसे--"कुरान की पाक आयत के सीने पे गिर रहा है,जिसे हर मुसलमान अपना दिन व ईमान मानता है."
तलाक महज एक शब्द भर नही बल्कि एक औरत का इस्लाम की आड़ मे किया गया वे कत्ल है जिसकी सदा इस मरदे मजहब ने कभी अपनी चाहरदिवारी के बाहर नही आने दिया।
उफ!औरत को कितना लिजलिज़ा और कमजोर कर दिया है कुछ लोगो ने कि पुछिये मत----"जिस औरत को उसकी चाहत और मोहब्बत का ईद मिलना था उसे इन चंद इबलिसे मौलवियो ने जबरदस्ती इस्लाम और हदिस का नाम लेकर एक हँसती खेलती औरत की जिंदगी मे तलाक लाकर उसे ताउम्र के लिये न खत्म होने वाले आँसू और गम के मोहर्रम से जोड़ दिया"।
आज तलाक के खिलाफ उठ रही तमाम आवाज़ो से इन लोगो की वे दरो-दिवार व बुनियादे कांपने लगी है सिकन से वे चेहरे तमतमा गये है लेकिन अब शायद ये बगावत न थमेगी आज औरत के वही तमाम दर्द बारुद बन गये है मेरा दावा है कि ये उठा हुआ इंकलाब हमारे हिन्दुस्तान की मुस्लिम औरतो के हक और हुकूक की नज़ीर बनेगा,और फिर बेज़ा तलाक दे रहे हर शौहर की रुह कांप जायेगी।
अब इनके पाक कानो को नमाज़ सुनाई देगी,कुरान की आयत सुनाई देगी लेकिन तलाक और हलाला के वे शरियती फरमान न सुनाई देगे ये बागी इंकलाब ऐसी नीच जहनियत को अपने बदलाव की उस सैलाबे दरिया मे बहा ले जायेगे जिसके बाद मुकद्दस इस्लाम होगा।
औरत के अच्छे दिन आयेगे,इस्लाम के अच्छे दिन आयेंगे,न कत्ल होगा किसी वालिद और अम्मी के दिये हुये उस मेहर का जिसे वे ताजिंदगी अपने शौहर व उसके परिवार के सुपूर्द करती है-------या अल्लाह जल्द मयस्सर हो उन्हें वे कानून जो इस मुल्क मे हर औरत को मयस्सर है यानिं कानून के अच्छे दिन।
@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U.P.)
mo.no.-----7800824758
यह लेख मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.
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