Saturday, 7 March 2026

खूबसूरत औरत नहीं देखी

(खूबसुरत औरत नही देखी)

माथे पे चुह-चुहाता पसीना,
कमर पे खुशी साड़ी!

और सर पे सीमेंट की भदेली,
श्रम की मादक चाल!

ऐ,रंग---
मेरी कविता ने कभी--
इतनी खूबसुरत औरत नही देखी।

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