Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 18 March 2026
मुसलमान है साहब
(मुसलमान है, साहब)
ना ही , पूजा
ना ही , किसी मस्जिद की ,
अजान है , साहब.
ये लड़की ,
इस दौर-ए-ग़ालिब की,
दीवान है , साहब.
बड़़े सलीके और
तमीज़ से ,
लिखा है , कई रात ,
ये एक रात , हिन्दू
तो एक रात मेरी ,
गज़लों की , ----
मुसलमान है , साहब.
@ रंगनाथ द्विवेदी
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