(1)
फुटपाथ पे अधनंगा--------
वे मासुम सुबह से ही बेच रहा,
आजादी का तिरंगा!
एै"रंग" उसके पेट का पिचकापन ही----
शायद उसके हिस्से का भारत है।
(2)
मै रोज देखती हूँ---------
खुली खिड़की से घंटो सड़क की तरफ,
एै"रंग" इस उम्मीद मे की शायद,
कभी दिख जाये--------------
वे मेरी बचपन का काबुलीवाला।
(3)
कहाँ उसकी माँ ने उसके बाल सँवारे,
कहाँ उसकी माँ ने बनाई उसकी चुटिया!
वे स्कूल के सामने की सड़क पे-------
टिन बजा के करतब दिखाती रही,
फिर कटोरे के चंद सिक्के,
अपनी फटी झोली मे भर आगे बढ़ गई,
करतब दिखाने नट की बिटिया।
(4)
आओ बाँटे तोहफे यतीमो में हम-------
किसी अपाहिज़ की बैशाखी,
या किसी गूँगे की मीठी जुबान हो जाये,
एै"रंग" आओ एक रात ही सही--------
हम सेंटा क्लाज हो जाये।
(5)
मै घंटो बतियाता हूँ माँ की कब्र से,
एै"रंग" एैसा मुझे लगता है कि,
जैसे इस कब्र से भी---------
मेरी माँ की दुआ आती है।
(6)
मै आज भी खाता हूँ---------
रेस्टोरेन्ट और बीबी का पकाया,
पर एै"रंग" भूख नही मिटती,
शायद वे मिला नही पाती खाने में-----
मेरी माँ के प्यार की रेसिपी।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758
No comments:
Post a Comment