Sunday, 15 March 2026

छापा था

(छापा था)
कल की होली में------------
कही गम तो कही सियापा था!
एक नेता रो रहे थे-----------
तक के अपनी तनहा कुर्सी,
जिसके आस-पास भीड़ थी,
पर हाय!रे चुनाव-----------
तुने बख्श़ा नही,जबकि घोषणापत्र में हमने
एै"रंग"--------------
सब कुछ कर डालेंगे एैसा छापा था।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!आपका निर्मेश के त्यागी भईया,दैनिक वर्तमान अंकुर और मेरे चुनावी कटाक्ष का।

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