Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 17 March 2026
आईना रो दे
(आईना रो दे)
मेरी आरज़ू का ऐ खूँ करने वाली,
खुदा करे!कल तेरे हाथो कि हिना रो दे।
तु जब सँवरने के लिये हो आईने के रुबरु,
मेरी वफ़ा का अक्स़ उभरे-----------
और तेरी कमीनगी पे आईना रो दे।
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