Saturday, 28 March 2026

सेब द चाइल्ड

(सेब द चाइल्ड लिखवा रही है)
किसी कन्या भ्रूण को कोई क्या मारेगा?
माँ खुद मरवा रही है।
हँसी-खुशी के साथ हजार दो हजार दे,
हर शहर के पैथालाॅजी मे रिपोर्ट ले,
किसी डाक्टर के टंगे नीले परदे के उस तरफ,
अपना एबार्शन करवा रही है।
आँख इसलिये भर आती है कि-------
इन तथाकथित माँओ ने कालेज मे पढ़ा है,
"इनके पथराये हृदयो ने--------
माँ शब्द की कोमलता खो दी है",
वही निरक्षर माँ----------
चार बेटिया जन पाप-पुण्य से डरती है,
सच तो ये है कि अपनी बेटियो के लिये-----
"उन पढ़ी-लिखि ढोंगी माँओ से ज्यादा,
अपनी इन बेटियो के लिये लड़ती है"।
सरकारी अमले की कारस्तानी तो और है,
जो महिला डाक्टर पैसे ले,
एबार्शन करवाने के लिये चर्चित है,
सुना है कि वही,
पुरे शहर की दिवालो पे-------------
"सेब द चाइल्ड लिखवा रही है"।

@@@भ्रूण हत्या को इंगित करती एक कविता।

रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर----222002 (उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

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