Sunday, 15 March 2026

बंजारन

(बंजारन)

मेरी जिंदगी मे आई थी कभी--
एक खानाबदोश बंजारन.

उसकी कत्थई आँखो को यादकर,
मै लिखता गया,लिखता गया,
न जाने कब--
एक मुकम्मल किताब बन गई!
ऐ,रंग--
वे खानाबदोश बंजारन.

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