Rangnath Dubey's Poems
Monday, 11 December 2023
(पंडित ना रहा)
(पंडित ना रहा)
तेरे रुप मे,इतना आकंठ डुबा
कि मै पंडित ना रहा।
तोड दी माला, त्याग दिया चंदन,
हाय! री उम्र की अल्हड नदी
तुझमे स्नान कर
मै पंडित न रहा।
तु सदियो पुरानी सुरा, सुन्दरी
तेरे आचमन की क्रिपा ये रही,
कि पंडित के घर का पला आदमी
ऐ रंग-पंडित ना रहा।
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