Tuesday, 19 December 2023

(मौलवी के होंठ)

(मौलवी के होंठ )

लेते है--
चाय की,चुस्कियां 
हमारे शहर में,
"कबीर" और "दादू" के होंठ.

और चाय भी
बड़े फक्र से लगती है,
अलसुबह 
हमारे शहर में---
हिंदी और उर्दू के होंठ..

तहजीब और सलीका 
हमारी रवायत हैं
तभी तो
पंडित को "राम राम"
कहने को खुलते हैं
यहां सबसे पहले "मौलवी के होंठ".

✍️✍️"यह रचना मेरी स्वलिखित व अप्रकाशित हैं,अतः बिना किसी भी प्रकार के अनुमति के इसका कहीं अन्यंत्र इस्तेमाल ना करें"🙏🙏

रंगनाथ द्विवेदी,
जौनपुर, उत्तर प्रदेश
mo.no.-7800824758

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