Tuesday, 5 December 2023

(इतवार केवल दिन नही)

(इतवार केवल दिन नहीं)

कभी किसी शनिवार वे आते है,
कभी किसी शनिवार मै जाती हूं!

ये भागमभाग,
ये नौकरी,ये भीड़ 
कि उबन से दुर--
कभी किसी इतवार वे मुझे पाते है,
कभी किसी इतवार मै उन्हें पाती हूं!

फिर अगली सुबह-लौटना होता है,
कभी दरवाजे़ पे वे मुझे छोड़ने आते है,
और कभी दरवाजे पे मै उन्हें छोड़ने जाती हूं!

इसलिये ए ,"रंग"----
अब हमारी जिंदगी मे इतवार केवल दिन नही,
मोहब्बत है,
जो हम एक दुसरे से कर पाते है!

रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

नौकरीपेशा लोगो का वे इतवार जिसका इंतज़ार वे बड़ी शिद्दत से एक दुसरे के लिये अलग-अलग शहरो में पुरे हफ्ते ट्रेन पे न बैठनें तलक करते है "!

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