Thursday, 7 December 2023

(कंगन भई सौतन)

(कंगन भई सौतन)
तुम्हरे न आये--------
हाय! कंगन भई सौतन।
रही-रही के हियरा मे हुक उठे हमरे,
हाय! तुम्हरे न आये---------
यौवन भई सौतन।
इ कजरा,इ बिंदिया,इ सेन्हुर,महावर
कैसे सजु और सँवरु,
हाय! चुभे अँगुरी मे बिछुवा,
तुम्हरे न आये---------
मोरे बैरी बलम कि पऊवाँ क हमरे पायल भई सौतन।
तुम्हरें न आये--------
हाय! कंगन भई सौतन।
हे पियवा तु आवअ छोड़ आपन नोकरिया,
तड़पत हौ दिल सेजिया पे पनिया से निकालल मछरी नियन,
हाय! बीना तोहरे रहले--------
कमरा के हमरे पलंग भई सौतन।
तुम्हरें न आये------
हाय! कंगन भई सौतन।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

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