Saturday, 2 December 2023

(कुंभ अलौकिक विश्व आस्था)

(कुंभ--अलौकिक विश्वआस्था )
प्रयाग के कुंभ का स्नान, महज स्नान ही नही अपितु--"ये एक विश्वआस्था है जो पुरी दुनिया मे अन्यंत्र दुर्लभ है ऐसा तीन महान नदियों का संगम केवल और केवल अनादि और अनंत काल से प्रयाग मे होता आया है और शायद इस धरती के रहते कायनात तक होता रहेगा".
ऐसा सदियों से धार्मिक व आध्यात्मिक मान्यता है कि--"यहाँ पे स्नान करने के लिये तमाम देवी-देवता बड़ी तल्लीनता के साथ इस सुअवसर का पुरे वर्ष इंतजार करते है".
ये प्रयाग के कुंभ का स्नान धीरे-धीरे और ज्यादा वृहद व समृद्ध होता गया,आज हालत ये है कि प्रयाग जैसे जिले मे इन तीन महान नदियों के यानी--गंगा,यमुना, सरस्वती के संगम तट पर--"लगभग-लगभग कुछ बड़े देशो की कुल संख्या को छोड़कर उसके बाद की कुल जनसंख्या वाले देश के इतनी संख्या महज संगम तट पे ठहरती है".
इस स्नान मे भारत की तमाम बहुरंगी और बहुआयामी धार्मिक संस्कृति का एक वृहद दृश्यावलोकन होता है,तमाम तरह के अखाड़े का ढोल-ताशे के साथ स्नान को आना एक अद्भुत और एक अलौकिक छवि का दर्शन कराते है.
इनके दर्शन की बड़ी ही समुचित व उच्च स्तर की व्यवस्था रहती है, अगर कहे तो इसे सकुशल संपन्न होने तक---"हमारे इस उत्तर-प्रदेश जैसे राज्य के मुख्यमंत्री तक को चैन की नीद नही आती".
संगम तट की धूनी,अलाव,संतो,महंतो और तमाम-तमाम मठो और गृहस्थो का एक महिने का कल्पवास इस संगम नगरी को एक दैवीय स्वर्ग सी धरती मे परिवर्तित कर हमे हमारे अंदर के मोह,माया,दंभ,द्वेश को मानो नष्ट कर देते है अर्थात " ये महज तीन नदियों के संगम का स्नान भर नही, बल्कि ये हमारी आत्म सिद्धि का त्रिलोक भी है".
  
आप सभी आईये----"हमारी आस्था संगम पे स्नान करती है".

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियाँपुर
जिला--जौनपुर पिन नं.222002 (उत्तर-प्रदेश).
Mo.no.7800824758

यह लेख मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.

No comments:

Post a Comment