Sunday, 17 December 2023

(कुत्ता होने से बच जा)

(कुत्ता होने से बच जा)

ऐ तरक्की झूठ मत बोल
मैंने
महंगे कुत्तों को घरों में
बूढ़े मां बाप से ज्यादा 
प्यार पाते देखा हैं
उन कुत्तों को भी 
ऐसे घरों के
कुत्तेपन पर मुस्कुराते देखा है .

गौर कर तो 
वे तेरे बेडरुम में
तुझसे भी ज्यादा करीब 
तेरी पत्नी के सोया है,
तू कभी उसकी जगह
सो के देख 
वे तुझे घुरेगा,
अपने दुश्मन कुत्ते की तरह

आंख खोल
उठ पगले
गैराज में खासती मां 
और ढाढस बंधाते बाप के 
सीने से लिपट जा
और
एक कुत्ता होने से बच जा.

यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर 
जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)

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