Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 7 March 2024
(खूबसूरत औरत नही देखी)
(खूबसुरत औरत नही देखी)
माथे पे चुह-चुहाता पसीना,
कमर पे खुशी साड़ी!
और सर पे सीमेंट की भदेली,
श्रम की मादक चाल!
ऐ,रंग---
मेरी कविता ने कभी--
इतनी खूबसुरत औरत नही देखी।
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