ना मज़लूम ना ही किसी से विवश हूँ,
मै खुद मे हू सक्षम,
और खुद मे जीवट हूँ।
मै भी खड़ी हूं------------
अब सदन से सड़क तक,
एै"रंग"बुथ पर मैं मतदान करती--------
इस लोकतंत्र की महिला दिवस हूँ।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758
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